Syscom Computer Education Institute
An ISO 9000:2015 Certified, Under U.P Govt Act 21, 1960 Registered , MSME Registered
कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों पर कार्य करती है। कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से मिलकर बना होता है। यह एक सार्वभौमिक मशीन है। कंप्यूटर शब्द अंग्रेज़ी के “Compute” शब्द से बना है, जिसका अर्थ है गणना करना। कंप्यूटर को हिंदी में “संगणक” कहा जाता है।
कंप्यूटर के कार्य करने के तीन चरण (Steps) होते हैं—
INPUT — PROCESS — OUTPUT
1. Input -
इस चरण में उपयोगकर्ता द्वारा कंप्यूटर को निर्देश या कमांड दिया जाता है।
2. Process -
इस चरण में कंप्यूटर दिए गए निर्देशों को प्रोसेस करता है और डेटा को सूचना (Information) में परिवर्तित करता है।
3. Output -
इस चरण में कंप्यूटर उपयोगकर्ता को परिणाम (आउटपुट) प्रदान करता है।
कंप्यूटर सिस्टम के प्रमुख घटक - कंप्यूटर सिस्टम निम्नलिखित मुख्य घटकों से मिलकर बना होता है—
1.CPU (Central Processing Unit) -
CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है। यह सभी प्रकार की गणनाएँ करता है और कंप्यूटर के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है। CPU के मुख्य भाग - CPU (Central Processing Unit) निम्न तीन यूनिट से मिलकर बना होता है—
A. CU (Control Unit – कंट्रोल यूनिट) -
कंट्रोल यूनिट कंप्यूटर से जुड़े हुए सभी उपकरणों (डिवाइस) और उनके कार्यों को नियंत्रित करती है, ताकि कंप्यूटर के सभी कार्य सही ढंग से किए जा सकें।
B. ALU (Arithmetic Logical Unit – अरिथमेटिक लॉजिकल यूनिट) -
ALU का पूरा नाम Arithmetic Logical Unit होता है। यह CPU का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसका उपयोग अंकगणितीय (जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग) तथा तार्किक (Logical) कार्यों को करने के लिए किया जाता है।
C. Memory Unit (MU – मेमोरी यूनिट) -
मेमोरी यूनिट CPU का एक भाग होती है। इसका उपयोग कंप्यूटर में डेटा, निर्देश (Instructions) और परिणामों को संग्रहित (Store) करने के लिए किया जाता है।
2. इनपुट डिवाइस (Input Device) -
इनपुट डिवाइस के माध्यम से उपयोगकर्ता कंप्यूटर को डेटा या निर्देश देता है।
उदाहरण: कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, माइक्रोफोन आदि।
3. आउटपुट डिवाइस (Output Device) -
आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर द्वारा किए गए कार्य का परिणाम उपयोगकर्ता को दिखाते हैं।
उदाहरण: मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर, प्रोजेक्टर आदि।
4. मेमोरी / स्टोरेज यूनिट (Memory / Storage Unit) -
मेमोरी कंप्यूटर में डेटा, प्रोग्राम और परिणामों को संग्रहित करने का कार्य करती है।
उदाहरण: RAM, ROM, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, CD/DVD आदि।
5. सॉफ्टवेयर (Software) -
सॉफ्टवेयर वे प्रोग्राम होते हैं जो कंप्यूटर को बताते हैं कि क्या और कैसे काम करना है।
उदाहरण: Windows, MS Word, Excel, Tally आदि।
6. हार्डवेयर (Hardware) -
हार्डवेयर कंप्यूटर के वे सभी भौतिक भाग होते हैं जिन्हें हम देख और छू सकते हैं।
उदाहरण: CPU, कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर, प्रिंटर आदि।
7. उपयोगकर्ता (User) -
उपयोगकर्ता वह व्यक्ति होता है जो कंप्यूटर का उपयोग करता है।
कंप्यूटर की विशेषताएँ (Characteristics of Computer) -
1. Speed (गति) -
कंप्यूटर के कार्य करने की गति बहुत तेज होती है। यह मनुष्य की तुलना में बहुत तेजी से कार्य करता है। कंप्यूटर एक सेकंड में लाखों गणनाएँ कर सकता है। कंप्यूटर की गति को हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है।
2. Accuracy (शुद्धता) -
कंप्यूटर बिना किसी गलती के कार्य करता है। जहाँ मनुष्य से कार्य करते समय गलतियाँ हो सकती हैं, वहीं कंप्यूटर सही निर्देश मिलने पर बहुत तेज़ गति से शुद्ध गणना करता है।
3. Memory (मेमोरी) -
कंप्यूटर की मेमोरी बहुत शक्तिशाली होती है। मनुष्य सभी बातों को याद नहीं रख सकता, लेकिन कंप्यूटर बड़ी मात्रा में डेटा को लंबे समय तक बिना भूले संग्रहित कर सकता है।
4. Diligence (परिश्रमशीलता) -
कंप्यूटर लगातार कई दिनों तक कार्य कर सकता है और कभी थकता नहीं है, जबकि मनुष्य कुछ समय बाद थक जाता है और उसे आराम की आवश्यकता होती है।
5. Automation (स्वचालित) -
कंप्यूटर एक स्वचालित मशीन है। एक बार निर्देश देने के बाद यह बिना किसी मानवीय सहायता के अपने कार्यों को स्वयं पूरा कर लेता है।
कंप्यूटर की सीमाएँ (Weakness of Computer) -
1. No IQ (बुद्धि का अभाव) -
कंप्यूटर में मनुष्य की तरह सोचने और समझने की क्षमता नहीं होती है। यह केवल दिए गए निर्देशों पर ही कार्य करता है।
2. No Feeling (भावनाओं का अभाव) -
कंप्यूटर में मनुष्य की तरह कोई भावना नहीं होती है। यह न तो खुशी महसूस करता है और न ही दुःख।
History of Computer (कंप्यूटर का इतिहास) -
कंप्यूटर का आविष्कार आज से लगभग 2000 वर्ष पहले हुआ था। लेकिन आधुनिक कंप्यूटर को अस्तित्व में आए हुए लगभग 50–60 वर्ष ही हुए हैं। कंप्यूटर के विकास का इतिहास बहुत पुराना है। आज हम जिस रूप में कंप्यूटर को देखते हैं, वह अचानक विकसित नहीं हुआ है, बल्कि यह हजारों वर्षों की वैज्ञानिक खोजों और विभिन्न आविष्कारों का परिणाम है।
1. Abacus (अबेकस) -
अबेकस का आविष्कार चीन में 16वीं शताब्दी में ली काई-चेन (Lee Kai-Chen) द्वारा किया गया था। इसका उपयोग जोड़ और घटाने के लिए किया जाता था। अबेकस तारों का एक फ्रेम होता है, जिनमें मिट्टी के गोल दाने पिरोए रहते हैं। व्यापारी इसका उपयोग गणना करने के लिए करते थे। आज के समय में कैलकुलेटर ने अबेकस का स्थान ले लिया है।
2. Napier’s Bones (नेपियर बोन्स) -
Napier’s Bones एक गणना करने वाला उपकरण था। इसका आविष्कार 1617 में स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक जॉन नेपियर (John Napier) द्वारा किया गया था। इसका उपयोग जोड़, घटाव, गुणा और भाग के लिए किया जाता था। यह दशमलव प्रणाली का उपयोग करने वाली पहली मशीन थी। इसे हाथी के दाँत से बनाया गया था, इसलिए इसे Napier’s Bones कहा गया।
3. Blaise Pascal’s Calculator (ब्लेज़ पास्कल का कैलकुलेटर) -
Pascal’s Calculator पहला यांत्रिक कैलकुलेटर था। इसका आविष्कार 1642 में फ्रांस में ब्लेज़ पास्कल द्वारा किया गया था। यह पहला स्वचालित (Automatic) कैलकुलेटर था। इसमें पहियों का प्रयोग किया गया था, जिनसे जोड़ और घटाव की गणना की जाती थी। इसे Pascaline या Adding Machine भी कहा जाता है।
4. Difference Engine (डिफरेंस इंजन) -
चार्ल्स बैबेज ने 1822 में Difference Engine का निर्माण किया। इस मशीन की सहायता से बीजगणितीय समीकरणों और गणितीय तालिकाओं की गणना की जा सकती थी। यह मशीन भाप से चलती थी और इसका उपयोग रेल, बीमा तथा व्यापारिक क्षेत्रों में किया जाता था।
5. Analytical Engine (एनालिटिकल इंजन) -
Difference Engine की सफलता से प्रेरित होकर चार्ल्स बैबेज ने 1830 में Analytical Engine का निर्माण किया। यह किसी भी प्रकार की गणितीय समस्या को हल करने में सक्षम था और इसमें डेटा को संग्रहित करने की क्षमता भी थी। यह आधुनिक कंप्यूटर का आधार माना जाता है।
👉 इसी कारण चार्ल्स बैबेज को “कंप्यूटर का जनक” कहा जाता है।
6. Tabulating Machine (टैबुलेटिंग मशीन) -
Tabulating Machine का उपयोग आँकड़ों को रिकॉर्ड और संग्रहित करने के लिए किया जाता था। यह पंच कार्ड पर आधारित मशीन थी। इसका उपयोग पहली बार 1890 की अमेरिकी जनगणना में किया गया। इसका आविष्कार 1880 में हरमन होलेरिथ (Herman Hollerith) ने किया। बाद में उनकी कंपनी 1924 में IBM (International Business Machines) बनी।
7. Mark-1 (मार्क-1) -
हावर्ड आइकेन ने IBM के सहयोग से 1930 में Mark-1 कंप्यूटर बनाया। यह गणितीय, लॉगरिदमिक और त्रिकोणमितीय गणनाएँ करने में सक्षम था।
8. ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Calculator) -
ENIAC का पूरा नाम Electronic Numerical Integrator and Calculator है। इसका आविष्कार J. Presper Eckert और John Mauchly ने पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में किया। यह दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था, जो बहुत तेज गति से गणनाएँ कर सकता था।
9. EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) -
EDSAC का पूरा नाम Electronic Delay Storage Automatic Calculator है। इसका निर्माण मौरिस विल्क्स ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) में किया। यह दुनिया का दूसरा Stored Program Electronic Computer था।
Classification of Computer (कंप्यूटर का वर्गीकरण) -
कंप्यूटर को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया गया है—
1. डेटा हैंडलिंग क्षमताओं के आधार पर
2. आकार (Size) के आधार पर
1. डेटा हैंडलिंग क्षमताओं के आधार पर कंप्यूटर - डेटा हैंडलिंग क्षमताओं के आधार पर कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं
1. Analog Computer (एनालॉग कंप्यूटर) -
एनालॉग कंप्यूटर वह कंप्यूटर होता है, जिसका उपयोग भौतिक मात्राओं को मापने के लिए किया जाता है।
भौतिक मात्राएँ जैसे— तापमान, दाब, गति, लंबाई, चौड़ाई आदि।
उपयोग: (A) पेट्रोल पंप (B) वैज्ञानिक कार्य (C) टेलीफोन लाइन
उदाहरण: Speedometer: वाहन की गति मापने के लिए, Auto Gasoline Pump: पेट्रोल की मात्रा और कीमत की गणना के लिए, Thermometer: तापमान मापने के लिए
2. Digital Computer (डिजिटल कंप्यूटर) -
डिजिटल कंप्यूटर कार्य करने के लिए बाइनरी संख्या प्रणाली (0 और 1) का उपयोग करता है। यह केवल 0 और 1 को ही समझता है।
इन कंप्यूटरों में स्टोरेज डिवाइस होती है, जिससे ये बड़ी मात्रा में डेटा संग्रहित कर सकते हैं। इनकी प्रोसेसिंग गति बहुत तेज होती है और इनका उपयोग दैनिक जीवन में किया जाता है।
उदाहरण: Apple Mac , Calculator (कैलकुलेटर) , IBM PC, Digital Clock (डिजिटल घड़ी), Desktop, Laptop
3. Hybrid Computer (हाइब्रिड कंप्यूटर)-
हाइब्रिड कंप्यूटर एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर दोनों का संयोजन होता है। इसमें दोनों प्रकार के कंप्यूटरों की विशेषताएँ होती हैं।
उपयोग: पेट्रोल पंप, हवाई जहाज, अस्पताल, वैज्ञानिक अनुसंधान
2. आकार (Size) के आधार पर कंप्यूटर - आकार के आधार पर कंप्यूटर पाँच प्रकार के होते हैं
1. Micro Computer (माइक्रो कंप्यूटर) -
माइक्रो कंप्यूटर आकार में छोटे होते हैं और इनमें CPU के स्थान पर माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग किया जाता है। ये हल्के, सस्ते और व्यक्तिगत उपयोग के लिए उपयुक्त होते हैं। पहला माइक्रो कंप्यूटर 1970 के दशक में विकसित हुआ था।
उदाहरण: Desktop Computer, Laptop Computer, Palmtop Computer, Notebook Computer, Tablet Computer
2. Mini Computer (मिनी कंप्यूटर) -
मिनी कंप्यूटर आकार में माइक्रो कंप्यूटर से बड़े और मेनफ्रेम कंप्यूटर से छोटे होते हैं। ये Multi-user computer होते हैं, यानी एक समय में कई उपयोगकर्ता इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं।इन्हें 1960 के दशक में IBM द्वारा विकसित किया गया था।
3. Mainframe Computer (मेनफ्रेम कंप्यूटर) -
मेनफ्रेम कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े और अत्यंत शक्तिशाली होते हैं। इनमें बहुत बड़ी मात्रा में डेटा संग्रहित किया जा सकता है। इनका उपयोग बड़ी कंपनियों और सरकारी कार्यालयों में किया जाता है। ये कंप्यूटर बहुत महंगे होते हैं।
4. Super Computer (सुपर कंप्यूटर) -
सुपर कंप्यूटर दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर होते हैं। इनका उपयोग वैज्ञानिक और इंजीनियर जटिल गणनाओं के लिए करते हैं।
उपयोग: मौसम की भविष्यवाणी, परमाणु ऊर्जा अनुसंधान, अंतरिक्ष अनुसंधान
सुपर कंप्यूटर को हिंदी में “महासंगणक” कहा जाता है। विश्व का पहला सुपर कंप्यूटर Cray-1 (1976) था। भारत का पहला सुपर कंप्यूटर PARAM-8000 है।
5. Workstation (वर्कस्टेशन कंप्यूटर) -
वर्कस्टेशन कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर की तुलना में अधिक शक्तिशाली होते हैं। इनमें तेज माइक्रोप्रोसेसर, अधिक RAM और हाई-स्पीड ग्राफिक्स कार्ड होता है।
उपयोग: वीडियो एडिटिंग, 3D एनीमेशन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेस्कटॉप पब्लिशिंग
Generation of Computer (कंप्यूटर की पीढ़ियाँ)
पिछले कुछ वर्षों में कंप्यूटर में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। इन परिवर्तनों के आधार पर कंप्यूटर के विकास को विभिन्न पीढ़ियों में वर्गीकृत किया गया है।
कंप्यूटर की कुल पाँच पीढ़ियाँ मानी जाती हैं—
1. First Generation (1940–1956)
2. Second Generation (1956–1963)
3. Third Generation (1964–1971)
4. Fourth Generation (1971–1980)
5. Fifth Generation (1980–वर्तमान)
1. First Generation (1940–1956) – प्रथम पीढ़ी
कंप्यूटर की पहली पीढ़ी में Vacuum Tube (वैक्यूम ट्यूब) का उपयोग किया गया था। वैक्यूम ट्यूब का आविष्कार 1904 में जॉन एम्ब्रोस फ्लेमिंग ने किया था।
इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में इनपुट के लिए पंच कार्ड और पेपर टेप का उपयोग किया जाता था।
विशेषताएँ: आकार में बहुत बड़े, अधिक बिजली की खपत, अधिक गर्मी उत्पन्न करते थे, ठंडा रखने के लिए Air Conditioning (AC) की आवश्यकता होती थी
उदाहरण: ENIAC, EDVAC, UNIVAC-1, UNIVAC-2, IBM-701, IBM-650
2. Second Generation (1956–1963) – दूसरी पीढ़ी
दूसरी पीढ़ी में Transistor (ट्रांजिस्टर) ने वैक्यूम ट्यूब का स्थान ले लिया। ट्रांजिस्टर का आविष्कार 1947 में William Shockley ने किया था।
ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब की तुलना में छोटे, तेज, सस्ते और अधिक विश्वसनीय थे।
विशेषताएँ: कंप्यूटर का आकार छोटा हुआ, कम बिजली की खपत, Assembly Language और High-Level Language का उपयोग
उदाहरण: IBM 1620, IBM 1401, IBM 7094, CDC 1604, CDC 3600, UNIVAC 1108
3. Third Generation (1964–1971) – तीसरी पीढ़ी
तीसरी पीढ़ी में Integrated Circuit (IC) का उपयोग किया गया। IC का आविष्कार 1959 में Jack Kilby ने किया था। IC को Silicon Chip भी कहा जाता है।
विशेषताएँ: कंप्यूटर का आकार और छोटा, प्रोसेसिंग स्पीड तेज, मेमोरी क्षमता में वृद्धि, High Level Language जैसे COBOL, Pascal का उपयोग
उदाहरण: IBM-360 Series, Honeywell-6000 Series, PDP, IBM-370/168, TDC-316
4. Fourth Generation (1971–1980) – चौथी पीढ़ी
चौथी पीढ़ी में Microprocessor (माइक्रोप्रोसेसर) का उपयोग किया गया। इसमें LSI और VLSI तकनीक का प्रयोग हुआ।
विशेषताएँ: कंप्यूटर अधिक आधुनिक और शक्तिशाली, प्रोसेसिंग स्पीड और क्षमता में वृद्धि, High Level Language जैसे C, C++ का उपयोग, इसी समय MS-DOS और MS-Windows जैसे Operating System विकसित हुए
उदाहरण: IBM 4341, DEC-10, STAR-1000, PDP-11
5. Fifth Generation (1980–वर्तमान) – पाँचवीं पीढ़ी
पाँचवीं पीढ़ी में Artificial Intelligence (AI) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान समय में यही पीढ़ी चल रही है।
विशेषताएँ: बहुत अधिक स्पीड, अत्यधिक कार्य क्षमता, आधुनिक प्रोग्रामिंग भाषाएँ जैसे C, C++, Java, .NET, रोबोटिक्स, चिकित्सा, मनोरंजन और गेमिंग में उपयोग
उदाहरण: Desktop, Laptop, Notebook, Chromebook, Ultrabook
कंप्यूटर और उसके अनुप्रयोगों का विकास
कंप्यूटर का आविष्कार आज से लगभग 2000 वर्ष पहले हुआ था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे कंप्यूटर का विकास भी होता गया। प्रारंभिक समय में गणना (Calculation) करने के लिए जिस उपकरण का उपयोग किया जाता था, उसे अबेकस (ABACUS) कहा जाता था।
अबेकस लकड़ी से बना हुआ एक उपकरण था, जिसमें तार और गोल दाने लगे होते थे। इन दानों को आगे-पीछे खिसकाकर गणना की जाती थी।
1642 ई. में ब्लेज़ पास्कल ने पहले यांत्रिक कैलकुलेटर का आविष्कार किया। यह मशीन केवल जोड़ (Addition) का कार्य कर सकती थी।
1822 में चार्ल्स बैबेज ने पहला Difference Engine (Mechanical Computer) विकसित किया।
कंप्यूटर और तकनीक से जुड़े प्रमुख आविष्कार
1876 ई. – अलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल ने टेलीफोन का आविष्कार किया
1886 ई. – विलियम बरोज़ ने यांत्रिक गणना मशीन विकसित की
1931 ई. – कोनराड ज़ूज़े ने पहला कैलकुलेटर बनाया
1940 ई. – रंगीन टेलीविजन प्रसारण शुरू हुआ
1948 ई. – IBM द्वारा इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर का निर्माण
1953 ई. – पहला हाई-स्पीड प्रिंटर विकसित हुआ
1958 ई. – पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर बनाया गया
1968 ई. – पहला मिनी कंप्यूटर (PDP-8) विकसित हुआ
1972 ई. – INTEL ने माइक्रोप्रोसेसर बनाया
1977 ई. – Apple ने पर्सनल कंप्यूटर बनाया
1992 ई. – Microsoft ने Windows Operating System विकसित किया
आईटी गैजेट्स और उनके उपयोग
IT Device वे उपकरण होते हैं जिनका उपयोग सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (Information Technology) के अंतर्गत किया जाता है। IT Gadgets ऐसी डिवाइस होती हैं जो हमारे कार्यों को आसान और तेज बनाती हैं।
आज के आधुनिक IT गैजेट्स में स्मार्टफोन, टैबलेट, डिजिटल टीवी और रोबोट आधारित तकनीक शामिल हैं। IT के प्रयोग ने हमारे दैनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है—
चाहे वह पढ़ाई हो, काम हो या संचार।
IT Gadgets की सूची -
Smart Watch, PDA (Personal Digital Assistant), Drone Camera, Pen with Camera, TV, Mobile, Laptop, Tablet, Desktop, Google Glass
Basic Application of Computer (कंप्यूटर के मूल अनुप्रयोग) -
आज के समय में कंप्यूटर हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। कंप्यूटर के प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं—
1. Word Processing -
वर्ड प्रोसेसिंग के द्वारा पत्र टाइप करना, रिज़्यूमे बनाना, रिपोर्ट तैयार करना आदि कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। कंप्यूटर स्वतः ही स्पेलिंग और व्याकरण की गलतियों को सुधार देता है।
2. Banking -
बैंकों में कंप्यूटर का उपयोग खातों की जानकारी रखने, पासबुक या बैंक स्टेटमेंट प्रिंट करने, लेन-देन को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। ATM मशीन भी कंप्यूटर का ही एक रूप है।
3. Internet -
इंटरनेट कंप्यूटर नेटवर्क को जोड़ने वाली एक वैश्विक प्रणाली है। इसके माध्यम से हम बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
4. Hospitals -
अस्पतालों में कंप्यूटर का उपयोग मरीजों के रिकॉर्ड, बीमारी की जानकारी, रिपोर्ट और इलाज से संबंधित डेटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
5. Education -
आज के समय में स्मार्ट क्लासरूम, ऑनलाइन शिक्षा, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट, रिपोर्ट और ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए कंप्यूटर का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
6. Railway and Airlines Reservation -
कंप्यूटर की सहायता से रेलवे और हवाई यात्रा के टिकट कहीं से भी आसानी से बुक किए जा सकते हैं और इसमें गलती की संभावना बहुत कम होती है।
Basics of Hardware and Software
Hardware (हार्डवेयर) –
कंप्यूटर के Physical Components को Hardware (हार्डवेयर) कहा जाता है। अर्थात् कंप्यूटर के वे सभी भाग जिन्हें हम देख और छू सकते हैं, हार्डवेयर कहलाते हैं।
कंप्यूटर में कई प्रकार के हार्डवेयर कंपोनेंट होते हैं, जिन्हें Motherboard के साथ जोड़ा जाता है, जैसे— Microprocessor, Hard Disk, Floppy Disk, Optical Disk, Monitor, Keyboard, Printer आदि।
कंप्यूटर के हार्डवेयर भागों को IPOS Chart के आधार पर चार भागों में बाँटा गया है
Input → Process → Output → Storage
Input Devices - Keyboard, Mouse, Scanner, Light Pen, OCR, BCR, MICR, OMR, Microphone, Touch Screen, Joystick, Webcam
Process - Microprocessor, RAM, ROM, Motherboard
Storage - Floppy Disk, Hard Disk, Optical Disk (CD, DVD, BRD), Pen Drive, Zip Drive, Tape Drive, Memory Card
Output Devices - Monitor, Printer, Speaker, Headphone, Projector, 3D Printer, Plotter
Input Device (इनपुट डिवाइस)-
इनपुट डिवाइस वे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती हैं जिनके माध्यम से हम डेटा या निर्देश (Instructions) कंप्यूटर में इनपुट करते हैं। इनपुट डिवाइस हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों को कंप्यूटर तक पहुँचाने का कार्य करती हैं।
कंप्यूटर में कई प्रकार के इनपुट डिवाइस उपयोग किए जाते हैं, जिनका प्रयोग अलग-अलग तरीकों से इनपुट देने के लिए किया जाता है।
कंप्यूटर में सबसे प्रमुख इनपुट डिवाइस Keyboard है।
1. Keyboard (की-बोर्ड) -
की-बोर्ड एक Basic Input Device है, जिसके द्वारा यूज़र विभिन्न Keys की सहायता से कंप्यूटर को कमांड देता है। की-बोर्ड में Letters, Numbers, Characters और Function Keys होती हैं।
Standard Keyboard में 101 से 105 Keys होती हैं
Multimedia Keyboard में इससे अधिक Keys होती हैं
यह सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली इनपुट डिवाइस है।
2. Mouse (माउस) - माउस एक Pointing Input Device है, जिसका प्रयोग Graphical User Interface (GUI) में किया जाता है। माउस में सामान्यतः तीन बटन होते हैं—
Left Button
Right Button
Scroll Button
माउस Wired और Wireless दोनों प्रकार के होते हैं।
Mouse के प्रकार— Optical Mouse, Wireless Mouse, Trackball Mouse
Optical Mouse –
इसमें Cursor को Move करने के लिए Ball की जगह LED Light या Sensor का प्रयोग किया जाता है। अधिकतर Optical Mouse में लाल रंग की LED होती है।
Wireless Mouse –
इसे कंप्यूटर से जोड़ने के लिए USB Cable की आवश्यकता नहीं होती। यह Radio, Bluetooth या Wi-Fi तकनीक से कार्य करता है।
Trackball Mouse –
इसमें Cursor को Move करने के लिए Ball Mechanism का प्रयोग होता है। Ball को उँगली, अंगूठे या हथेली से घुमाया जाता है।
3. Joystick -
Joystick एक इनपुट डिवाइस है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से Gaming में किया जाता है।
4. Scanner -
Scanner का प्रयोग Physical Documents और Images को Digital Format में बदलने के लिए किया जाता है।
5. OMR (Optical Mark Reader) -
OMR एक इनपुट डिवाइस है, जिसका प्रयोग परीक्षाओं, सर्वे और फॉर्म की जाँच के लिए किया जाता है।
6. MICR (Magnetic Ink Character Recognition) -
MICR तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से Bank Cheque में छपी जानकारी को पढ़ने के लिए किया जाता है।
7. Light Pen -
Light Pen एक इनपुट डिवाइस है, जिसका उपयोग Touch Screen Computer पर Drawing और Graphic Design के लिए किया जाता है।
8. BCR (Barcode Reader) -
Barcode Reader का उपयोग Barcode में छपी जानकारी को पढ़ने के लिए किया जाता है, जैसे— Product Name, Price, Batch Number, Company Name आदि।
9. Microphone -
Microphone एक इनपुट डिवाइस है, जिसका उपयोग ध्वनि (Sound) को कंप्यूटर में इनपुट करने के लिए किया जाता है। यह ध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में परिवर्तित करता है।
Output Device (आउटपुट डिवाइस) -
Output Device वह डिवाइस होती है, जो कंप्यूटर से डेटा प्राप्त करके उसे Text, Image, Video या Audio के रूप में यूज़र को दिखाती या सुनाती है।
आउटपुट डिवाइस, इनपुट डिवाइस की विपरीत (Opposite) होती है।
इनपुट डिवाइस कंप्यूटर को डेटा भेजती है
आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर से डेटा प्राप्त करती है
आउटपुट डिवाइस कई प्रकार की होती हैं, जो निम्नलिखित हैं—
1. Monitor (मॉनिटर) -
मॉनिटर कंप्यूटर का एक मुख्य आउटपुट डिवाइस है, जिसे Visual Display Unit (VDU) भी कहा जाता है। यह टीवी की तरह दिखाई देता है। मॉनिटर का मुख्य कार्य यूज़र द्वारा दिए गए इनपुट को स्क्रीन पर प्रदर्शित (Display) करना होता है।
Types of Computer Monitor
(i) CRT Monitor -
CRT का पूरा नाम Cathode Ray Tube है। CRT मॉनिटर में चित्र दिखाने के लिए Electronic Beam का उपयोग किया जाता है।
इस इलेक्ट्रॉनिक बीम के अंदर एक प्रकार की Electron Gun होती है, जो इलेक्ट्रॉन किरणें छोड़ती है।
ये किरणें बार-बार मॉनिटर की स्क्रीन से टकराती हैं, जिससे विभिन्न रंग उत्पन्न होते हैं और चित्र या वीडियो दिखाई देता है।
👉 यह एक पुरानी तकनीक है, जिसका उपयोग पहले के कंप्यूटर और टेलीविजन में किया जाता था।
(ii) LCD Monitor -
LCD का पूरा नाम Liquid Crystal Display है। यह आज सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला मॉनिटर है।
LCD मॉनिटर की विशेषताएँ— 1. कम जगह घेरता है, 2. कम बिजली की खपत करता है, 3. कम गर्मी उत्पन्न करता है , 4. CRT की तुलना में पतला और हल्का होता है
(iii) LED Monitor -
LED का पूरा नाम Light Emitting Diode है। यह एक फ्लैट-स्क्रीन मॉनिटर होता है, जिसे LED Display भी कहते हैं। इसमें प्रकाश स्रोत के रूप में LED Panel का उपयोग किया जाता है। यह बहुत पतला, हल्का और आकर्षक डिज़ाइन वाला होता है।
2. Printer (प्रिंटर) -
प्रिंटर कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस है। यह डिजिटल फ़ाइल (Text, Image आदि) को Hard Copy में बदल देता है।
प्रिंटर द्वारा प्राप्त कागज़ को Printout कहा जाता है।
Types of Printer -
प्रिंटर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं— 1. Impact Printer, 2. Non-Impact Printer
1. Impact Printer -
Impact Printer वह प्रिंटर होता है, जिसमें Print Head, Ribbon और Paper के बीच Physical Contact होता है। इसमें Ink Ribbon की सहायता से कागज़ पर छपाई की जाती है।
Impact Printer के प्रकार— R Dot Matrix Printer, R Daisy Wheel Printer, R Line Printer, R Chain Printer, R Drum Printer
(i) Dot Matrix Printer -
Dot Matrix Printer एक Impact Printer है, जो एक समय में केवल एक अक्षर (Character) प्रिंट करता है। इसमें एक Print Head होता है, जो बाएँ-दाएँ घूमकर अक्षर और चित्र प्रिंट करता है। यह स्याही की छोटी-छोटी बूँदों से प्रिंट करता है।
👉 आजकल इसका उपयोग कम हो गया है, क्योंकि यह High Quality Print नहीं देता।
👉 वर्तमान में इसका उपयोग पैकेज डिलीवरी कंपनियों और ऑटो पार्ट स्टोर्स में किया जाता है।
(ii) Daisy Wheel Printer -
इस प्रिंटर में प्रिंटिंग के लिए एक प्लास्टिक का पहिया (Wheel) उपयोग किया जाता है। यह पहिया गुलबहार (Daisy Flower) के आकार का होता है, इसलिए इसे Daisy Wheel Printer कहते हैं।
2. Non-Impact Printer -
Non-Impact Printer में प्रिंटिंग के दौरान Paper और Print Head का कोई Physical Contact नहीं होता। ये प्रिंटर Electrostatic और Inkjet Technology का उपयोग करते हैं।
👉 Non-Impact Printer, Impact Printer की तुलना में तेज़ और शांत होते हैं।
Non-Impact Printer के प्रकार—R Inkjet Printer, R Thermal Printer, R Laser Printer, R Electromagnetic Printer, R Electrostatic Printer
(i) Inkjet Printer -
Inkjet Printer एक Non-Impact Printer है, जिसमें कागज़ पर स्याही की छोटी बूँदें Spray की जाती हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से घर और ऑफिस में किया जाता है।
जैसे— R स्कूल प्रोजेक्ट, R फोटो, R फोटोकॉपी आदि
(ii) Thermal Printer -
Thermal Printer में छपाई के लिए Heat (गर्मी) का उपयोग किया जाता है। यह Thermal Paper पर प्रिंट करता है। यह सस्ता और तेज़ प्रिंटर होता है। इसका उपयोग बड़ी कंपनियों में किया जाता है, जहाँ लगातार प्रिंटिंग की आवश्यकता होती है।
(iii) Laser Printer -
Laser Printer एक Non-Impact Printer है, जिसमें स्याही की जगह Laser Beam (प्रकाश) का उपयोग किया जाता है। यह High Quality और Color Printing करता है।
इसका उपयोग अधिकतर— R Office, R Printing Shop, R Scanning, R Photocopy, R Fax जैसे कार्यों में किया जाता है।
3. Plotter -
Plotter एक आउटपुट डिवाइस है, जिसका उपयोग Large Size Drawing, Graph, Banner और Poster प्रिंट करने के लिए किया जाता है।
Plotter के प्रकार— R Drum Pen Plotter , R Flatbed Plotter
4. Projector -
Projector एक आउटपुट डिवाइस है, जो Video या Image को बड़ी स्क्रीन या दीवार पर Display करता है।
5. Speaker -
Speaker एक आउटपुट डिवाइस है, जो Sound (ध्वनि) उत्पन्न करता है।
6. Headphone -
Headphone एक आउटपुट डिवाइस है, जिसका उपयोग आवाज़ और गाने सुनने के लिए किया जाता है।
Computer Memory & Storage
Computer Memory-
Computer Memory कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें Data और Information को संग्रह (Store) करके रखा जाता है।
बिना मेमोरी के कंप्यूटर काम नहीं कर सकता।
जिस प्रकार मनुष्य डेटा और सूचना को याद रखने के लिए अपने मस्तिष्क (Brain) का उपयोग करता है, उसी प्रकार कंप्यूटर Data और Information को संग्रहित करने के लिए Memory का उपयोग करता है।
कंप्यूटर की मेमोरी को छोटे-छोटे भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें Cell कहा जाता है।
इन Cells में डेटा Binary Form (0 और 1) के रूप में स्टोर होता है।
Types of Memory (मेमोरी के प्रकार)
मेमोरी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है— 1 . Primary Memory (मुख्य मेमोरी), 2. Secondary Memory (सहायक मेमोरी)
1. Primary Memory (प्राइमरी मेमोरी)
Primary Memory कंप्यूटर की Main Memory होती है। इसमें वह डेटा और प्रोग्राम स्टोर रहते हैं, जिन पर CPU वर्तमान समय में कार्य (Process) कर रहा होता है।
यह मेमोरी दो प्रकार की हो सकती है— 1. Volatile, 2. Non-Volatile
Primary Memory में मौजूद डेटा को CPU बहुत तेज़ गति से Read करता है, क्योंकि यह CPU के बहुत पास स्थित होती है।
Primary Memory को— R Internal Memory, R Primary Storage भी कहा जाता है।
यह मेमोरी सामान्यतः Semiconductor Material से बनी होती है और Secondary Memory की तुलना में महंगी होती है।
👉 Primary Memory के बिना कंप्यूटर कार्य नहीं कर सकता।
Primary Memory के प्रकार
Primary Memory मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है—
1. RAM (Random Access Memory)
RAM का पूरा नाम Random Access Memory है। RAM में डेटा केवल तब तक स्टोर रहता है जब तक कंप्यूटर ON रहता है।
जैसे ही कंप्यूटर OFF होता है, RAM में मौजूद डेटा अपने आप समाप्त (Delete) हो जाता है। इसलिए RAM को Volatile Memory कहा जाता है।
RAM की विशेषताएँ— R डेटा को तेज़ गति से Access करती है, R कंप्यूटर की Speed बढ़ाती है, R अस्थायी (Temporary) मेमोरी होती है
RAM के प्रकार— 1. SRAM (Static RAM), 2.DRAM (Dynamic RAM)
2. ROM (Read Only Memory)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory है। यह एक Non-Volatile Memory है। इसमें संग्रहित डेटा हमेशा के लिए सुरक्षित रहता है। यदि बिजली चली जाए या कंप्यूटर बंद हो जाए, तब भी ROM का डेटा नष्ट नहीं होता। ROM में डेटा को Permanent रूप से Store किया जाता है।
ROM के प्रकार— 1. PROM (Programmable Read Only Memory), 2. EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory), 3. EEPROM (Electrically Erasable Programmable Read Only Memory)
3. Cache Memory
Cache Memory एक अत्यंत तेज़ गति से कार्य करने वाली मेमोरी होती है। इसका उपयोग CPU की Speed और Performance बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसमें वह डेटा और फाइलें स्टोर की जाती हैं, जिनका उपयोग CPU बार-बार करता है। जब CPU को किसी डेटा की आवश्यकता होती है, तो वह सबसे पहले उसे Cache Memory में खोजता है।
Cache Memory के प्रकार—
Cache Memory की विशेषताएँ—
✔ Primary Memory से भी अधिक तेज़ होती है
✔ डेटा स्थायी रूप से स्टोर नहीं रहता
✔ बहुत कम मात्रा में डेटा स्टोर करती है
✔ कीमत बहुत अधिक होती है
2. Secondary Memory (सेकेंडरी मेमोरी) -
Secondary Memory भी कंप्यूटर की एक मेमोरी है, लेकिन इसे CPU सीधे Access नहीं कर सकता। यह मेमोरी कंप्यूटर का आंतरिक भाग नहीं होती, बल्कि इसे अलग से जोड़ा जाता है। Secondary Memory एक Non-Volatile Memory है, अर्थात— कंप्यूटर बंद होने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है इसका उपयोग Permanent Data को Store करने के लिए किया जाता है, ताकि भविष्य में उपयोग किया जा सके।
Primary Memory की तुलना में— 1. Storage Capacity अधिक होती है, 2. Data Access Speed कम होती है
Secondary Memory के उदाहरण—
1. Hard Disk, 2. Pen Drive, 3. CD, 4. DVD, 5. Blu-ray Disc, 6. Magnetic Tape, 7. Floppy Disk, 8. SSD
Hard Disk -
Hard Disk का उपयोग कंप्यूटर में Data Store करने के लिए किया जाता है। इसे Hard Disk Drive (HDD) भी कहा जाता है। Hard Disk में एक ही धुरी पर लगी कई चुंबकीय डिस्क (Magnetic Disk) होती हैं। इसकी Storage Capacity बहुत अधिक होती है।
आजकल Hard Disk की क्षमता— 256 GB से लेकर 1 TB या उससे अधिक होती है।
Pen Drive -
Pen Drive एक छोटा और पोर्टेबल Secondary Storage Device है। इसका उपयोग मुख्य रूप से Data Transfer के लिए किया जाता है। यह— संगीत, फिल्म, फोटो, दस्तावेज़ स्टोर करने में उपयोगी है।
Pen Drive को— USB Flash Drive, USB Drive भी कहा जाता है।
Floppy Disk -
Floppy Disk एक वृत्ताकार डिस्क होती है, जिसके दोनों ओर चुंबकीय परत लगी होती है। इसमें डेटा Track और Sector में स्टोर होता है। इसके लिए Floppy Drive की आवश्यकता होती है। आजकल इसका उपयोग लगभग समाप्त हो चुका है।
DVD -
DVD का पूरा नाम— R Digital Video Disc or R Digital Versatile Disc
DVD एक Optical Disc है, जिसका उपयोग अधिक मात्रा में डेटा स्टोर करने के लिए किया जाता है।
DVD की Storage Capacity— R 4.7 GB से 17.08 GB तक होती है।
इसका उपयोग मुख्य रूप से— R Movies, R Video, R Software Store करने के लिए किया जाता है।
Software (सॉफ्टवेयर) -
Software निर्देशों (Instructions) और प्रोग्रामों (Programs) का एक समूह होता है। बिना सॉफ्टवेयर के कंप्यूटर कोई भी कार्य नहीं कर सकता। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को यह बताता है कि— R कौन-सा कार्य करना है, R कब करना है, R और कैसे करना है
सॉफ्टवेयर बनाने के लिए विभिन्न Programming Languages का उपयोग किया जाता है, जैसे— C Language, Java, .NET, JavaScript, Python, Android आदि
Types of Software (सॉफ्टवेयर के प्रकार) - सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—
1.System Software (सिस्टम सॉफ्टवेयर), 2. Application Software (एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर)
1. Application Software (एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर)
Application Software वह सॉफ्टवेयर होता है, जिसे यूजर के विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए विकसित किया जाता है। कंप्यूटर और मोबाइल में दिखाई देने वाले सभी Apps एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण हैं।
👉 इन्हें हम आसानी से— R Install, R Uninstall कर सकते हैं।
Application Software के प्रकार
1. Horizontal Software -
वे सॉफ्टवेयर जिनका उपयोग सभी प्रकार के यूजर करते हैं।
उदाहरण – 1. MS Office, 2. Photoshop, 3. Tally
2. Vertical Software -
वे सॉफ्टवेयर जो किसी विशेष संगठन या कार्य के लिए बनाए जाते हैं।
उदाहरण – 1. Finacle, 2. MIBS,
अन्य प्रकार के Application Software - Shareware / Trial Software इन सॉफ्टवेयर को खरीदने से पहले कुछ समय के लिए Trial Version दिया जाता है।
उदाहरण – CorelDraw,
Freeware Software -
ये सॉफ्टवेयर पूरी तरह मुफ्त होते हैं। उदाहरण – VLC, Nero
Open Source Software -
इन सॉफ्टवेयर के साथ Source Code भी दिया जाता है, जिसे यूजर अपनी आवश्यकता अनुसार बदल सकता है।
उदाहरण – Linux, LibreOffice, Google Chrome
Commercial Software -
इन सॉफ्टवेयर को उपयोग करने के लिए खरीदना या लाइसेंस लेना पड़ता है।
उदाहरण – MS Office, Adobe Photoshop
Nagware -
ये Shareware का ही प्रकार होते हैं। Trial Time समाप्त होने पर ये सॉफ्टवेयर खरीदने का संदेश (Reminder) दिखाते हैं।
उदाहरण – WinRAR
2. System Software (सिस्टम सॉफ्टवेयर) -
System Software वह सॉफ्टवेयर होता है जो— 1.कंप्यूटर को नियंत्रित (Control) करता है, 2. कंप्यूटर को मैनेज करता है यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर होता है। इसके बिना कंप्यूटर Start भी नहीं हो सकता।
System Software—
Hardware और Application Software के बीच समन्वय बनाता है
Background में चलता है
कंप्यूटर के सभी कार्यों को अपने आप संभालता है
System Software के उदाहरण-
1. Operating System, 2. Firmware, 3. Antivirus Software, 4. Disk Formatting Software, 5. Language Translator
Operating System (OS)
Operating System एक System Software है, जो— 1. User और Hardware के बीच संवाद स्थापित करता है, 2. Application Software को चलाने के लिए Platform प्रदान करता है, 3. Hardware को Control करता है
Language Translator Software
Interpreter - Interpreter एक System Software है जो— 1. High Level Language को, 2. Line by Line, 3. Machine Language में बदलता है
👉 यह Compiler से धीमा होता है
👉 कम मेमोरी उपयोग करता है
👉 तुरंत Result दिखाता है
Compiler
Compiler एक System Software है जो—
Processing के बाद Result यूजर को दिखाया जाता है।
Assembler
Assembler एक System Software है जो—
Assembly Language को
Machine Language में बदलता है
Types of System Software - 1. Operating System, 2. Interpreter, 3. Compiler, 3. Assembler, 4. Debugger, 5. Loader, 5. Linker, 6. Device Driver, 7. Utility Software
Utility Software (यूटिलिटी सॉफ्टवेयर) -
Utility Software वह सॉफ्टवेयर होता है, जिसका उपयोग—
1. कंप्यूटर को Analyze करने, 2. Configure करने, 3. Monitor करने, 4. और Manage करने के लिए किया जाता है। यह कंप्यूटर की Performance को बनाए रखता है।
Utility Software के कार्य -
1. Virus की पहचान करना, 2. Data Backup लेना, 3. खराब Files को Delete करना, 4. Disk Management करना
Utility Software के उदाहरण -
1. Antivirus Software, 2. Disk Cleanup Tool, 3. File Management System, 4. Disk Management Tool
Open Source और Proprietary Software
Open Source Software - वे सॉफ्टवेयर जिनका Source Code उपलब्ध होता है और यूजर उसमें बदलाव कर सकता है।
उदाहरण – 1. Linux, 2. Ubuntu, 3. Mozilla Firefox, 4. WordPress
Proprietary Software - वे सॉफ्टवेयर जिन्हें मुफ्त में उपयोग नहीं किया जा सकता।
👉 इन्हें खरीदना पड़ता है
👉 Source Code में बदलाव की अनुमति नहीं होती
इन्हें— 1. Closed Source Software, 2. Commercial Software भी कहा जाता है।
उदाहरण – 1. Adobe Photoshop, 2. CorelDraw, 3. Microsoft Office, 4. Tally
Mobile Applications (मोबाइल ऐप्स) -
Mobile App एक Software होता है, जिसे— 1. Smartphone, 2. Tablet, 3. iPhone, 4. iPad के लिए विकसित किया जाता है।
Types of Mobile Applications
1. Native App - 1. केवल एक Operating System के लिए, 2. अन्य Device पर Compatible नहीं
2. Web-Based App - 1. HTML, CSS, JavaScript से बनते हैं, 2. Browser से Access होते हैं, 3. Performance कम होती है
3. Hybrid App - 1. एक ही Code से, 2. कई Devices पर चल सकते हैं
Mobile App के उदाहरण -
1. WhatsApp, 2. Facebook , 2. Gmail, 3. Instagram, 4. YouTube, 5. Chrome
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